शैक्षणिक सूचना वार्षिक परीक्षा सत्र 2026-27 अभ्यर्थी नामांकन प्रारम्भ परीक्षा रूपरेखा देखें
परीक्षाएँ संगीत परीक्षाएँ · प्रारम्भिक से संगीताचार्य तक परीक्षा विवरण देखें
शैक्षणिक सहभागिता सम्बद्ध परीक्षा केंद्र एवं संस्थान बनें सम्बद्धता विवरण
अध्यापन से जुड़ें संगीत साधकों की अगली पीढ़ी को अपना ज्ञान प्रदान करें अध्यापन विवरण
अकादमिक एवं सांस्कृतिक केंद्र

संगीत एवं प्रदर्शन कला विधाएं

वृन्दावन संगीत समिति में शिक्षण और सांस्कृतिक अध्ययन औपचारिक परीक्षा पाठ्यक्रमों, विशिष्ट शिक्षण क्षेत्रों और समर्पित विरासत पहलों में व्यवस्थित हैं।

संपूर्ण 6-विधा संरचना देखें: विधा केंद्र देखें →
विभाग 01 औपचारिक डिप्लोमा

भारतीय शास्त्रीय गायन

आवाज का विकास, स्वर साधना, राग विस्तार और Delhi Gharana एवं Jaipur Gharana परंपराओं पर विशेष शैक्षणिक ध्यान के साथ अनुशासित तालीम।

घराना केंद्र: Delhi Gharana एवं Jaipur Gharana परंपराएं
विभाग 02 औपचारिक डिप्लोमा

ध्रुपद एवं हवेली संगीत

प्राचीन नोम-तोम आलापचारी, धमार, और ब्रज का पावन मंदिर संगीत जो मौखिक परंपरा और अष्टप्रहर सेवा से संरक्षित है।

अध्ययन मार्ग: मंदिर संप्रदाय • गुरुकुल साधना • खरज रियाज़
विभाग 03 औपचारिक डिप्लोमा

ताल वाद्य: पखावज एवं तबला

ध्वनि निकास की स्पष्टता, ठेका, कायदा, रेला, टुकड़ा और शास्त्रीय ध्रुपद, ख्याल, वाद्य व भक्ति पद-गायन में संगत का प्रशिक्षण।

अध्ययन मार्ग: पखावज शास्त्र • बनारस / दिल्ली तबला • लयकारी
विभाग 04 औपचारिक डिप्लोमा

शास्त्रीय तंतु वाद्य: सितार एवं सरोद

मिज़राब अनुशासन, तंत्रकारी, मींड, गमक, जोड़-झाला और सितार तथा उत्तर भारतीय तंतु वाद्यों पर विलंबित व द्रुत गत रचनाएं।

अध्ययन मार्ग: तंत्रकारी अंग • संगीत विशारद • राग व्याकरण
अध्ययन क्षेत्र नृत्य केंद्र

कत्थक: जयपुर घराना

कत्थक नृत्य, Jaipur Gharana परंपरा पर केंद्रित, जिसमें ताल, भाव-अभिव्यक्ति, अंग-संचालन और संगीतात्मक संगत के संबंध का अध्ययन किया जाता है।

संबंध केंद्र: लय • भाव • अंग संचालन • संगीतात्मक संगत
सांस्कृतिक तकनीक अध्ययन क्षेत्र

म्यूजिक प्रोडक्शन

Music Production, एक ऐसा क्षेत्र जो आवश्यकतानुसार संगीत, रिकॉर्डिंग, दस्तावेजीकरण और डिजिटल प्रस्तुति को आपस में जोड़ता है।

शैक्षणिक दायरा: ध्वनि रिकॉर्डिंग • दस्तावेजीकरण • डिजिटल प्रस्तुति
सांस्कृतिक अध्ययन • पावन पद-साहित्य विरासत अध्ययन

ब्रज रस पद-गायन एवं भक्ति संगीत

Braj Ras Pad-Gayan, Vaishnav Acharyas' Pad और पारंपरिक भक्ति पद-साहित्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए, साथ ही Bhakti Sangeet जो वृन्दावन और Pad-Bhav से जुड़े भक्ति संगीत अभ्यास पर केंद्रित है।

मार्गदर्शित शिक्षण और मौखिक परंपरा के साथ सांस्कृतिक एवं विरासत अध्ययन क्षेत्र।
पावन ताल वाद्य परंपरा विरासत मार्ग

श्री खोल परंपरा

Sri Khol, पारंपरिक भक्ति ताल वाद्य विरासत का एक विशिष्ट क्षेत्र जो गुरु मार्गदर्शन में ब्रज संकीर्तन और पद-गायन संगत से गहराई से जुड़ा हुआ है।

मार्गदर्शित अध्ययन पथ के साथ विशिष्ट सांस्कृतिक अध्ययन क्षेत्र।
शैक्षणिक दर्शन

अभ्यास द्वारा सीखना (साधना)

संगीत को केवल बौद्धिक सिद्धांत या पठन-पाठन से नहीं समझा जा सकता। शास्त्रीय परंपरा में वास्तविक बोध तभी विकसित होता है जब सिद्धांत और ध्वनि अभ्यास दैनिक रियाज़ में एकरूप हो जाते हैं।

चरण 01
श्रवण (सुनना)
चरण 02
बोध (समझना)
चरण 03
आवृत्ति (दोहराना)
चरण 04
रियाज़ (साधना)
चरण 05
मार्गदर्शन
चरण 06
प्रस्तुति
चरण 07
आत्मचिंतन

सजग श्रवण और गुरु के निरंतर मार्गदर्शन में किए गए नियमित अभ्यास से अमूर्त संगीत सिद्धांत सहज संस्कार में बदल जाते हैं, जिससे विद्यार्थी राग और ताल में स्वाभाविक सौंदर्य के साथ विचरण करने में सक्षम होते हैं।

परंपरागत शिक्षण

गुरु-शिष्य परंपरा का संबंध

पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय संगीत ज्ञान मौखिक परंपरा पर आधारित है। इसे मशीनी स्क्रीन या बिना मार्गदर्शन के अभ्यास में सीमित नहीं किया जा सकता।

  • सजग श्रवण: शिक्षक से सीधे सूक्ष्म स्वर और श्रुतियों का ग्रहण करना।
  • अवलोकन एवं अनुकरण: हाथ की स्थिति, श्वास प्रबंधन और अलंकारों का यथार्थ अभ्यास।
  • नियमित रियाज़ एवं परिमार्जन: सहानुभूतिपूर्ण और नियमित समीक्षा से त्रुटियों का सुधार।
  • परंपरा की निरंतरता: पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक बंदिशों और ज्ञान की प्राप्ति।

समिति के सभी विभागों में शिक्षण इस व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर आधारित है, जो विनम्रता और संपूर्ण सांगीतिक समझ विकसित करता है।

सांस्कृतिक समन्वय

ब्रज विरासत एवं शास्त्रीय समन्वय

वृन्दावन संगीत समिति में भारतीय शास्त्रीय संगीत, ब्रज विरासत और भक्ति भाव को अलग-अलग नहीं देखा जाता। वे एक ही ताने-बाने में बंधे हैं:

  • ब्रज संगीत एवं पद-भाव: पवित्र ब्रज पद-साहित्य की भावनात्मक गहराई से अनुप्राणित शास्त्रीय राग।
  • पद-गायन परंपराएं: राग व्याकरण और छंद नियमों से बंधी प्राचीन मंदिर गायन शैलियां।
  • शास्त्रीय स्वर सिद्धांत: व्याकरणिक स्वर शुद्धता को व्यावसायिक समझौते के बिना बनाए रखना।
  • पारंपरिक ताल ज्ञान: जटिल ताल चक्र जो भक्ति संकीर्तन को उत्कृष्ट ध्वनि कला का रूप देते हैं।

हमारा शैक्षणिक वातावरण संगीत को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध विषय मानता है, जो गरिमा बनाए रखते हुए सतहीपन से दूर रहता है।

युवा शिक्षण एवं परंपरा संवहन

युवा शिक्षण ढांचा (Youth Learning Framework)

युवा शिक्षार्थियों को प्रारंभिक स्वर ज्ञान से अनुशासित सांगीतिक समझ की ओर ले जाने वाला एक संरचित मार्ग:

01
प्रारंभ
अभिरुचि एवं स्वर परिचय
02
सीखना
प्रत्यक्ष गुरु मार्गदर्शन
03
रियाज़
नियमित दैनिक अभ्यास
04
प्रस्तुति
बैठक व मंच का अनुभव
05
मूल्यांकन
मानकीकृत बोर्ड परीक्षा
06
प्रमाणन
समिति का प्रामाणिक प्रमाण-पत्र
07
संवहन
परंपरा को आगे बढ़ाना
संरचित प्रगति

अकादमिक स्तर एवं परीक्षा रूपरेखा

वृन्दावन संगीत समिति के मानकीकृत परीक्षा नियमों के अंतर्गत स्थापित पांच-स्तरीय शास्त्रीय ढांचा।

स्तर 1 • प्रारंभिक चरण

प्रारंभिक एवं प्रवेशिका

प्राथमिक स्वर-ज्ञान, सप्तक पहचान, आसन, बुनियादी अलंकार और प्रारंभिक बंदिश रचनाएं।

अकादमिक स्तर: प्रारंभिक चरण
स्तर 2 • माध्यमिक चरण

मध्यमा

राग विस्तार का विकास, छोटा व बड़ा ख्याल, धमार, ताल लिपि अंकन और मंच प्रस्तुति की तैयारी।

अकादमिक स्तर: माध्यमिक चरण
स्तर 3 • उच्च डिप्लोमा चरण

संगीत विशारद

व्यापक राग सौंदर्य, जटिल लयकारी, विलंबित गायन-वादन और संपूर्ण मंच प्रस्तुति में दक्षता।

अकादमिक स्तर: उच्च डिप्लोमा चरण
स्तर 4 • स्नातकोत्तर डिप्लोमा चरण

संगीत निपुण / अलंकार

दुर्लभ रागों की प्रस्तुति, बंदिश रचना, तुलनात्मक शास्त्र अध्ययन और शोध प्रबंध।

अकादमिक स्तर: स्नातकोत्तर डिप्लोमा चरण
स्तर 5 • अध्येतावृत्ति एवं शोध

संगीताचार्य

विशिष्ट शोध अध्येतावृत्ति, मौखिक परंपरा का संरक्षण और शैक्षणिक मार्गदर्शन।

अकादमिक स्तर: अध्येतावृत्ति एवं शोध चरण
विस्तृत परीक्षा रूपरेखा एवं पाठ्यक्रम देखें →
पाठ्यक्रम सूची

अकादमिक पाठ्यक्रम एवं अध्ययन विवरण

प्रत्येक पाठ्यक्रम सांगीतिक अनुशासन, प्रामाणिक रियाज़ और औपचारिक बोर्ड मूल्यांकन के लिए संरचित है।

Vocal 3 Years Diploma

Hindustani Classical Vocal (Khayal, Dhrupad & Gaudiya Kirtanang)

एक अनुशासित शास्त्रीय गायन पाठ्यक्रम जो ख्याल तालीम और ब्रज के पारंपरिक ध्रुपद अंग को समाहित करता है। विद्यार्थियों को स्वर-शुद्धि, राग-रचना, और बंदिश प्रस्तुति में पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है।

1. किसके लिए: गंभीर गायन आकांक्षी, संगीत विद्यार्थी और हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में अनुशासित तालीम के इच्छुक साधक।
2. क्या सीखेंगे: प्रारंभिक से उन्नत राग (यमन, भूपाली, बागेश्री, जौनपुरी, भैरव एवं ब्रज के पारंपरिक राग), सप्तक नियंत्रण, स्वर अ...
3. अभ्यास विधि: दैनिक रियाज़: प्रातःकालीन मन्द्र सप्तक साधना, स्वर ठहराव, और तीनताल, एकताल, झपताल में लयकारी अभ्यास।...
4. मूल्यांकन: परीक्षा मंडल के समक्ष क्रियात्मक (प्रैक्टिकल) प्रस्तुति, राग व्याकरण पर मौखिक (viva voce) और शा...
पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन विवरण देखें

मूल्यांकन विभाजन: 75% क्रियात्मक (प्रैक्टिकल एवं मौखिक) + 25% शास्त्रीय (सिद्धांत एवं लिपि)।

अध्ययन प्रारूप: नियमित गुरुकुल (वृन्दावन परिसर) / संबद्ध केंद्र।

उत्तीर्ण श्रेणियां: उत्तीर्ण: 33% • द्वितीय श्रेणी: 48% • प्रथम श्रेणी: 60% • विशिष्ट योग्यता (Distinction): 75%+।

Vocal 2 Years Advanced

Dhrupad & Haveli Sangeet

भारत की प्राचीनतम शास्त्रीय गायन विधा और ब्रज के पावन हवेली संगीत का विशिष्ट अध्ययन। यह गंभीरता, शुद्ध राग चिंतन और अगाध पद-भाव पर केंद्रित है।

1. किसके लिए: शास्त्रीय संगीत के बुनियादी ज्ञान वाले गायक जो ध्यानपूर्ण, पारंपरिक और पवित्र संगीत रूपों में लीन होना चाहते हैं।
2. क्या सीखेंगे: चार भागों की ध्रुपद बंदिशें (स्थायी, अंतरा, संचारी, आभोग), धमार रचनाएं, छंद-शास्त्र, हवेली संगीत के ऋतु पद और ...
3. अभ्यास विधि: मन्द्र सप्तक में गहन खरज साधना, श्वास नियमन, और चौताल, धमार, सूलताल में लयकारी रियाज़।...
4. मूल्यांकन: नोम-तोम आलाप और बंदिश विस्तार की विस्तृत क्रियात्मक प्रस्तुति एवं मंदिर संगीत परंपराओं पर मौखिक...
पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन विवरण देखें

मूल्यांकन विभाजन: 75% क्रियात्मक (प्रैक्टिकल एवं मौखिक) + 25% शास्त्रीय (सिद्धांत एवं लिपि)।

अध्ययन प्रारूप: नियमित गुरुकुल (वृन्दावन परिसर) / संबद्ध केंद्र।

उत्तीर्ण श्रेणियां: उत्तीर्ण: 33% • द्वितीय श्रेणी: 48% • प्रथम श्रेणी: 60% • विशिष्ट योग्यता (Distinction): 75%+।

Percussion 3 Years Diploma

Srikhol & Tabla, Pakhawaj

मंदिर पखावज और शास्त्रीय तबले की लयबद्ध परंपराओं का व्यवस्थित प्रशिक्षण। इसमें निकास की स्पष्टता, बोल-शास्त्र और संगत पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

1. किसके लिए: ताल वाद्य के आकांक्षी, संगतकार और भारतीय शास्त्रीय ताल विधाओं में व्यवस्थित तालीम चाहने वाले विद्यार्थी।
2. क्या सीखेंगे: शास्त्रीय तालें (तीनताल, झपताल, रूपक, एकताल, चौताल, धमार, कहरवा), पारंपरिक कायदे, पेशकार, रेले, टुकड़े, परन, च...
3. अभ्यास विधि: अंगुलियों का अभ्यास, कलाई का लचीलापन, लहरा के साथ रियाज़ और विभिन्न लयकारियों (थाह, दुगुन, तिगुन, चौगुन, ...
4. मूल्यांकन: लहरा के साथ स्वतंत्र क्रियात्मक वादन, गायन के साथ तात्कालिक संगत, ताली-खाली के साथ मौखिक पढ़ंत ...
पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन विवरण देखें

मूल्यांकन विभाजन: 75% क्रियात्मक (प्रैक्टिकल एवं मौखिक) + 25% शास्त्रीय (सिद्धांत एवं लिपि)।

अध्ययन प्रारूप: नियमित गुरुकुल (वृन्दावन परिसर) / संबद्ध केंद्र।

उत्तीर्ण श्रेणियां: उत्तीर्ण: 33% • द्वितीय श्रेणी: 48% • प्रथम श्रेणी: 60% • विशिष्ट योग्यता (Distinction): 75%+।

Instrumental 3 Years Diploma

Sitar & Classical String Instruments

सितार और उत्तर भारतीय तंतु वाद्यों के लिए शास्त्रीय पाठ्यक्रम। विद्यार्थी मिज़राब के सटीक प्रहार, अंगुलियों की गति और राग विकास की तकनीक सीखते हैं।

1. किसके लिए: तंतु वाद्य सीखने वाले, संगीत प्रेमी और गुरु परंपरा में वाद्य साधना करने के इच्छुक विद्यार्थी।
2. क्या सीखेंगे: आलाप-जोड़-झाला, मसीतखानी (विलंबित) व रज़ाखानी (द्रुत) गत, जटिल तिहाइयां, दाहिने हाथ के बोल (दा-रा-दिर-दा), और ...
3. अभ्यास विधि: अंगुलियों की मजबूती, धीमी गति में मींड का शुद्ध अभ्यास, और लहरा के साथ विभिन्न गतियों में स्पष्ट बोल वादन...
4. मूल्यांकन: तबले की संगत में संपूर्ण आलाप, जोड़, झाला और गत की क्रियात्मक प्रस्तुति एवं मौखिक परीक्षा।...
पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन विवरण देखें

मूल्यांकन विभाजन: 75% क्रियात्मक (प्रैक्टिकल एवं मौखिक) + 25% शास्त्रीय (सिद्धांत एवं लिपि)।

अध्ययन प्रारूप: नियमित गुरुकुल (वृन्दावन परिसर) / संबद्ध केंद्र।

उत्तीर्ण श्रेणियां: उत्तीर्ण: 33% • द्वितीय श्रेणी: 48% • प्रथम श्रेणी: 60% • विशिष्ट योग्यता (Distinction): 75%+।

अकादमिक नामांकन

शास्त्रीय संगीत पाठ्यक्रमों में प्रवेश लें

आगामी अकादमिक सत्र के लिए सभी विधाओं और स्तरों में प्रवेश प्रारंभ हैं। मूल्यांकन स्वर पहचान, सांगीतिक अभिरुचि और साधना के प्रति समर्पण पर आधारित है।

प्रवेश हेतु आवेदन करें अकादमिक डेस्क से संपर्क करें