पाठ्यक्रम एवं अध्ययन रूपरेखा
यह पाठ्यक्रम किसके लिए है
ताल वाद्य के आकांक्षी, संगतकार और भारतीय शास्त्रीय ताल विधाओं में व्यवस्थित तालीम चाहने वाले विद्यार्थी।
मुख्य अध्ययन बिंदु
निकास, हाथ का संतुलन, लय स्मृति, पढ़ंत और स्वतंत्र वादन व संगत दोनों में निपुणता।
आप क्या सीखेंगे
शास्त्रीय तालें (तीनताल, झपताल, रूपक, एकताल, चौताल, धमार, कहरवा), पारंपरिक कायदे, पेशकार, रेले, टुकड़े, परन, चक्रदार और गायन-वादन व पद-गायन में संगत।
अभ्यास एवं रियाज़
अंगुलियों का अभ्यास, कलाई का लचीलापन, लहरा के साथ रियाज़ और विभिन्न लयकारियों (थाह, दुगुन, तिगुन, चौगुन, आठगुन) का अभ्यास।
परंपरा और विरासत
भारतीय संगीत की ताल परंपरा, जो ब्रज के मंदिर संगीत को शास्त्रीय मंच परंपरा से जोड़ती है।
परीक्षा एवं मूल्यांकन
लहरा के साथ स्वतंत्र क्रियात्मक वादन, गायन के साथ तात्कालिक संगत, ताली-खाली के साथ मौखिक पढ़ंत और लिपि मूल्यांकन।
प्रमाण-पत्र
बोर्ड मूल्यांकन के पश्चात वृन्दावन संगीत समिति के अकादमिक ढांचे के अनुसार प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।
Srikhol & Tabla, Pakhawaj
VSS-CRS-003
वर्तमान अकादमिक सत्र के लिए संबद्ध केंद्रों और वृन्दावन परिसर में प्रवेश प्रारंभ हैं।
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