पाठ्यक्रम एवं अध्ययन रूपरेखा
यह पाठ्यक्रम किसके लिए है
गंभीर गायन आकांक्षी, संगीत विद्यार्थी और हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में अनुशासित तालीम के इच्छुक साधक।
मुख्य अध्ययन बिंदु
आवाज का विकास (voice modulation), स्वर-स्थिरता, राग विस्तार, लय-अनुशासन और घराना बंदिशों का अभ्यास।
आप क्या सीखेंगे
प्रारंभिक से उन्नत राग (यमन, भूपाली, बागेश्री, जौनपुरी, भैरव एवं ब्रज के पारंपरिक राग), सप्तक नियंत्रण, स्वर अलंकार, तानकारी पैटर्न, बोल-आलाप और ताल लिपि पद्धतियां।
अभ्यास एवं रियाज़
दैनिक रियाज़: प्रातःकालीन मन्द्र सप्तक साधना, स्वर ठहराव, और तीनताल, एकताल, झपताल में लयकारी अभ्यास।
परंपरा और विरासत
वृन्दावन और उत्तर भारतीय शास्त्रीय परंपराओं से जुड़ा, जहाँ तकनीकी सिद्धि भक्ति एवं आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनती है।
परीक्षा एवं मूल्यांकन
परीक्षा मंडल के समक्ष क्रियात्मक (प्रैक्टिकल) प्रस्तुति, राग व्याकरण पर मौखिक (viva voce) और शास्त्र विश्लेषण।
प्रमाण-पत्र
सफलतापूर्वक निर्धारित मानक पूर्ण करने पर वृन्दावन संगीत समिति के परीक्षा ढांचे के अंतर्गत प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है।
Hindustani Classical Vocal (Khayal, Dhrupad & Gaudiya Kirtanang)
VSS-CRS-001
वर्तमान अकादमिक सत्र के लिए संबद्ध केंद्रों और वृन्दावन परिसर में प्रवेश प्रारंभ हैं।
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